
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| नाम | गुरु राम दास जी |
| पिता का नाम | भाई हरी दास |
| माता का नाम | माता दया जी |
| जन्म स्थान | चुनी मंडी, लाहौर (अब पाकिस्तान) |
| पति/पत्नी का नाम | बीबी भानी |
| संतान के नाम | बाबा पृथी चंद, बाबा महा देव, (गुरु) अर्जन देव |
| गुरुगद्दी संभालने का समय | 1574, गोविंदवाल में |
| स्थापित शहर | अमृतसर 1574 में, पहले इसे चक गुरु का और रामदासपी कहा जाता था |
| अमृतसर सरोवर खुदाई | स्वर्ण मंदिर (हरिमंदर साहिब) में अमृतसर सरोवर |
| बाणी | 638 पद 30 रागों में, उदाहरण: आसा, बसन्त, गौरी, मझ, रामकाली और सुही आदि |
| समकालीन शासक | सम्राट अकबर (1556 – 1605) |
| संदेश | सच्चे सिख बनो परमात्मा का नाम अपने मन में बसाओ गुरु की महिमा गाओ |
| विशेष योगदान | गुरु साहिब ने ‘चार लावां’ राग सीही में रचित की, 38 श्लोकों में, जो आत्मा और परमात्मा के एकता का प्रतीक हैं |
| ज्योति जोत | 1581, गोविंदवाल, अमृतसर में |
