
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| नाम | गुरु अर्जन देव जी |
| पिता का नाम | गुरु राम दास जी |
| माता का नाम | माता भानी |
| जन्म तिथि | 15 अप्रैल 1563 |
| जन्म स्थान | गोइंदवाल, ज़िला अमृतसर |
| पत्नी का नाम | बीबी गंगा देवी |
| संतान का नाम | (गुरु) हरगोबिंद जी |
| गुरुगद्दी प्राप्ति | 1 सितम्बर 1581, गोइंदवाल |
| स्थापित नगर | • 1588 में संतोखसर सरोवर का निर्माण पूर्ण किया • 1588 में हरिमंदर साहिब का निर्माण आरंभ किया • 1590 में तरन तारण साहिब में सरोवर की खुदाई की • ब्यास नदी के किनारे श्री हरगोबिंदपुर नगर बसाया |
| बाणियाँ | कुल 2312 शब्द, 30 रागों में (श्री राग, आसा, बसंतू, माज, गुजरी, गौड़ी, सुही आदि) 1581–1604 में उच्चारित |
| समकालीन शासक | • सम्राट अकबर (1556–1605) • सम्राट जहांगीर (1605–1626) |
| संदेश | सुखमनी साहिब (राग गौड़ी, 1601–1604): • सच्चे जीवन का सार • आत्मा का परमात्मा से मिलन • गुरु और संतजनों का महत्व |
| विशेष योगदान | • 1604 में आदि ग्रंथ का संकलन किया • सिखों को दशमांश (दसवंध) देने की प्रेरणा दी • पहले सिख शहीद बने और शहादत की परंपरा की नींव रखी |
| जोति जोत | 30 मई 1606, लाहौर (अब पाकिस्तान) |
