
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| नाम | गुरु अमर दास जी |
| पिता का नाम | भाई तेज भान |
| माता का नाम | माता सुलखनी |
| जन्म तिथि | 5 मई 1479 |
| जन्म स्थान | गाँव बसरके, जिला अमृतसर |
| पत्नी का नाम | बीबी मंसा देवी |
| संतानों के नाम | बाबा मोहन, बाबा मोहरी, बीबी दानी, बीबी भानी |
| गुरुगद्दी प्राप्ति | 1552 खडूर साहिब में |
| स्थापित नगर | 1552 में ब्यास नदी के किनारे गोविंदवाल |
| बाणियां | 907 शब्द 17 रागों में (श्री राग, आसा, मझ, गुजरी, सौरठी, गौरी आदि) गुरु साहिब ने 1554 ई. में राग रामकली में आनंदु रचा |
| समकालीन शासक | बादशाह अकबर (1556 – 1605) |
| संदेश | सती प्रथा और पर्दा प्रथा को समाप्त करने का संदेश |
| विशेष योगदान | – 22 केंद्र (मंजियां) स्थापित कीं, जो मुगलों के 22 परगनों की तर्ज पर थीं – लंगर प्रणाली को नया जोश प्रदान किया – गुरु साहिब की प्रार्थना पर बादशाह अकबर ने गैर-मुसलमानों पर लगने वाला जज़िया कर समाप्त किया |
| ज्योति ज्योत | 1 सितम्बर 1574 को गोविंदवाल, जिला अमृतसर में |
